सिनेमाई सपनों की भव्य संसद
कुछ स्थान केवल उत्सवों की मेजबानी करते हैं , लेकिन कान की बात निराली है। यह एक ऐसा शहर है जो हर साल कुछ दिनों के लिए खुद को पूरी तरह सिनेमा के हवाले कर देता है। इसके होटल महत्वाकांक्षाओं के प्रतीक्षा कक्ष बन जाते हैं , इसके कैफे पुरस्कारों और प्रीमियर की चर्चाओं से गूंजते हैं , और इसके फुटपाथ इंतजार की भाषा सीख जाते हैं। दोपहर तक यहां ग्लैमर की मशीनरी सजती दिखाई देती है और शाम होते - होते यह एक पावन अनुष्ठान का रूप ले लेती ...

