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हंसता हुआ क्रांतिकारी

बंगाली   रंगमंच   में   उनकी   कला   शोषण   और   दमन   के   विरुद्ध   बिगुल   थी   तो   वहीं   हिंदी   सिनेमा   में   अद्भुत   रूप   से   हास्य   का   संचार   करती   थी   उनकी भाव - भंगिमा।   कला   के   इन   दो   विपरीत   ध्रुवों   को   एक   साथ   साधने   वाले   उत्पल   दत्त  ( जन्म -29  मार्च , 1939)  पर   संदीप   भूतोड़िया   का   आलेख ...   छ   कलाकार   मनोरंजन   करते   हैं ,  कुछ   जागरूक   करते   हैं ,  लेकिन   कुछ   विरले   ऐसे   भी   होते   हैं   जो   क्रांति   लाते   हैं।   उत्पल   दत्त   इसी   श्रेणी   में   आते   थे -  अभिनेता ,  नाटककार ,  रंगमंच   के   दार्शनिक   और   शब्दों   के ...

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